` पंजाब इंस्टीच्यूट आफ मेडिकस साइंसिज (पिम्स) में मनोरोग विभाग नें विश्व स्किझोफ्रेनिया दिवस मनाया गया

पंजाब इंस्टीच्यूट आफ मेडिकस साइंसिज (पिम्स) में मनोरोग विभाग नें विश्व स्किझोफ्रेनिया दिवस मनाया गया

Department of Psychiatry at Punjab Institute of Medicus Sciences PIMS celebrated World Schizophrenia Day share via Whatsapp

Department of Psychiatry at Punjab Institute of Medicus Sciences PIMS celebrated World Schizophrenia Day

 

इंडिया न्यूज सेंटर,जालंधरः पंजाब इंस्टीच्यूट आफ मेडिकस साइंसिज (पिम्स) में मनोरोग विभाग नें विश्व स्किझोफ्रेनिया दिवस मनाया गया । इस मौके पर एमबीबीएस के विद्यार्थियों ने स्किट पेश की। जिसको सभी ने सराहा। इस अवसर पर पिम्स के कार्यकारी निदेशक डा. कंवलजीत सिंह, रेजिडेंट डायरेक्टर अमित सिंह और डायरेक्टर प्रिंसीपल डा. राजीव अरोड़ा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से लोगों के साथ एमबीबीएस के बच्चों में जागरुकता बढ़ती है। 

उन्होंने बताया कि जिस प्रकार उन्होंने नाटक का मंचन किया काफी सराहनीय है। उम्मीद करते हैं किय आगे भी इसी तरह जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा। मनोरोग विभाग के प्रमुख डा. हिमांशू सरीन डा. दीपाली गुल और डा, राजिंदर मागो ने बताया कि स्किझोफ्रेनिया एक तरह का मानसिक असंतुलन है, जो दुनिया में एक प्रतिशत आबादी पर असर करता है। यह जिंदगी के सभी पहलुओ को यहां तक कि व्यक्ति की सोच, एहसास और व्यपहार को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया की स्किझोफ्रेनिया महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में जल्दी आयु में होता है।

उन्होंने इनके कारणों के बारे में बताया कि यह दिमाग में रसायनों जैसे कि डोपामीन, नारएपीनेफ्रीन, सिरोटोनिन, गाबा एंव गलूटामेट में गड़बड़ी से स्किझफ्रेनिया होने की संभावनाएं होती है। लक्ष्णों के बारे में उन्होंने बताया कि स्किझोफ्रेनिया से प्रभावित व्यक्ति अपनी दुनियां में खोया रहता है। इसके अलावा दूसरों पर शक करना, तरह-तरह की आवाजें सुनाई देना, अपनी सफाई का ध्यान ना देना, बात-बात पर गुस्सा हो जाना इसके मुख्य लक्ष्ण है। ऐसे व्यक्ति को अपनी भावनाएं व्यक्त करने में मुश्किल हो सकती है। अगर इस प्रकार के लक्ष्ण मरीज में देखें तो तुरंत मनोविज्ञानिक डाक्टर की सलाह लें।

उन्होंने बताया कि पारिवारिक मदद और दवाइयों से इस बिमारी काफी हृद तक कम किया जा सकता है। पारिवारिक सदस्य स्किझोफ्रेनिया से प्रभावित नियमित रिकार्ड रखें। जैसे कि व्यक्ति ने दवाई ली या नहीं अगर दवाई ली है, तो कितनी मात्रा में ली, उसके व्यवहार में कितना बदलाव आया, गुस्सा होने पर भी मरीज से प्यार से बात करना। मरीज का मन काम में लगाने के लिए मदद करें।

इस अवसर पर पिम्स के पिम्स के डीन (अंडक ग्रेजुएट) डा, एंच.के चीमा, डामेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. पुनीत खुराना, डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. तानिया मोडगिल उपस्थित थे।

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Source: INDIA NEWS CENTRE

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